बिहार में बढ़ती बिजली की माँग को देखते हुए राज्य सरकार ने अगले पांच साल के लिए बड़ा निवेश प्लान तैयार किया है। करीब ₹1,38,541 करोड़ की यह योजना बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन और रिन्यूएबल एनर्जी पर केंद्रित है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 24 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता और 6 GWh एनर्जी स्टोरेज तैयार करना है। ऐसे में Bihar solar investment 2026 राज्य की ऊर्जा व्यवस्था में बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।
Bihar Solar Plan 2026 में ₹1.38 लाख करोड़ का क्या प्लान है?
रिपोर्ट के मुताबिक कुल निवेश में करीब ₹82,679 करोड़ बिजली उत्पादन, ₹24,683 करोड़ ट्रांसमिशन, ₹28,809 करोड़ डिस्ट्रीब्यूशन और ₹2,370 करोड़ रखरखाव पर खर्च किए जाएंगे। यानी Bihar power investment 2026 सिर्फ नए पावर प्लांट लगाने तक सीमित नहीं है। बिजली को राज्य के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने और मौजूदा नेटवर्क को मजबूत करने पर भी बड़ा खर्च होगा।
2030 तक 24 GW Renewable Energy Target का क्या मतलब है?
बिहार की Renewable Energy Policy 2025 के तहत 2030 तक करीब 24 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें सोलर पावर की बड़ी भूमिका होगी। आसान भाषा में समझें तो 24 GW का मतलब 24,000 MW तक नई रिन्यूएबल क्षमता तैयार करना है। इसके साथ 6 GWh स्टोरेज का लक्ष्य भी है, ताकि सोलर से बनी बिजली को जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सके।
बिहार में बिजली की माँग कितनी बढ़ी?
राज्य में औसत रोजाना बिजली माँग करीब 7,300 से 7,400 MW है, जबकि गर्मियों में पीक डिमांड लगभग 9,500 MW तक पहुँच जाती है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य की अपनी उत्पादन क्षमता करीब 550 MW है और बड़ी मात्रा में बिजली बाहर से खरीदनी पड़ती है। 2030 तक बिजली की माँग 11,700 MW से ऊपर जाने का अनुमान है।
यही वजह है कि Bihar electricity news में यह निवेश योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य ने FY2025-26 में बिजली उपभोक्ताओं से लगभग ₹19,000 करोड़ से अधिक राजस्व जुटाया, जबकि बाहर से बिजली खरीदने पर सालाना करीब ₹25,000 करोड़ से ₹35,000 करोड़ तक खर्च होने की जानकारी सामने आई है।
किन प्रोजेक्ट्स पर रहेगा फोकस?
निवेश योजना में 2,400 MW पीरपैंती थर्मल पावर प्रोजेक्ट और 1,440 MW नबीनगर TPP स्टेज-II जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। पीरपैंती प्रोजेक्ट के लिए बिहार सरकार की कंपनी BSPGCL ने 2,400 MW बिजली सप्लाई का समझौता किया है।
इसके अलावा कजरा सोलर प्रोजेक्ट, सोलर पार्क, रूफटॉप सोलर, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर पर भी जोर दिया जाएगा। करीब 2,400 MW पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं से जुड़े MoU भी किए गए हैं।
आम उपभोक्ताओं को क्या फायदा होगा?
अगर योजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं तो बिहार में बिजली उत्पादन बढ़ने के साथ ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क भी मज़बूत होगा। इससे पीक समय में सप्लाई बेहतर करने और बाहर से बिजली खरीद पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि इससे बिजली बिल तुरंत कम होगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी।
कुल मिलाकर Bihar solar power को बढ़ावा देने की यह योजना केवल सोलर क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। उत्पादन, स्टोरेज और बिजली नेटवर्क में एक साथ निवेश करके बिहार अपनी बढ़ती ऊर्जा ज़रूरत को पूरा करने की तैयारी कर रहा है।