Punjab Teachers Ration Card Duty: पंजाब के लुधियाना में सरकारी स्कूलों के 658 शिक्षकों को नए राशन कार्ड आवेदनों की जांच और सत्यापन के काम में लगाया गया है। यह जिम्मेदारी पंजाब सरकार की ‘Meri Rasoi’ योजना से जुड़े राशन कार्ड आवेदनों के verification के लिए दी गई है। प्रशासन का कहना है कि कर्मचारियों की कमी के कारण शिक्षकों की मदद लेनी पड़ी है।
खास बात यह है कि शिक्षकों को यह जिम्मेदारी ऐसे समय दी गई है जब सरकारी स्कूलों में आंतरिक परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। इस आदेश के बाद शिक्षकों के बीच नाराजगी सामने आई है। उनका कहना है कि गैर-शैक्षणिक काम के लिए शिक्षकों को स्कूल से बाहर लगाने से पढ़ाई और परीक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
658 शिक्षकों को क्यों दी गई Ration Card की ड्यूटी?
लुधियाना जिला प्रशासन ने नए राशन कार्ड के लिए मिले आवेदनों की जांच करने के लिए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को तैनात किया है। SDM (East) Jasleen Kaur Bhullar के अनुसार, इस काम के लिए प्रशासन के पास पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं था, इसलिए शिक्षकों की सेवाएं ली गईं।
जारी निर्देश में जिला शिक्षा अधिकारियों को संबंधित शिक्षकों को तुरंत उनकी मौजूदा शैक्षणिक ड्यूटी से relieved करने के लिए कहा गया है, ताकि वे राशन कार्ड applications के verification का काम कर सकें।
‘Meri Rasoi’ योजना से जुड़ा है पूरा मामला
यह verification पंजाब सरकार की Meri Rasoi योजना के तहत नए राशन कार्ड से जुड़े लाभार्थियों के आवेदन के लिए किया जा रहा है।
राज्य सरकार के अनुसार, Meri Rasoi का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक योजना के तहत बड़ी संख्या में परिवारों को राशन किट उपलब्ध कराई जा रही हैं।
पंजाब के आधिकारिक e-PDS पोर्टल पर भी राशन कार्ड और beneficiary verification से संबंधित आंकड़े उपलब्ध हैं।
Teachers को किस बात की चिंता?
शिक्षकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह ड्यूटी स्कूलों की परीक्षाओं के ठीक पहले दी गई है। सरकारी स्कूलों में internal examinations शुरू होने वाली हैं और ऐसे समय में कुछ शिक्षकों को स्कूल से बाहर भेजे जाने पर teaching और examination management पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
शिक्षकों का यह भी कहना है कि कई शिक्षक पहले से ही अन्य गैर-शैक्षणिक सरकारी कार्यों में लगाए गए हैं। Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ शिक्षक BLO और Special Intensive Revision (SIR) जैसी जिम्मेदारियों में भी जुड़े हुए हैं।
इस वजह से शिक्षक संगठनों ने सवाल उठाया है कि जब सरकारी स्कूलों में पहले से staff shortage है, तो शिक्षकों को लगातार दूसरे प्रशासनिक कामों में लगाने से छात्रों की पढ़ाई कैसे प्रभावित नहीं होगी।
RTE Act को लेकर भी उठे सवाल
शिक्षकों ने इस deployment को लेकर Right to Education (RTE) Act की Section 27 का मुद्दा भी उठाया है। उनका तर्क है कि कानून के तहत teachers को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने पर सीमाएं हैं और ऐसे कार्यों को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं।
हालांकि, इस मामले में प्रशासन की ओर से मुख्य तर्क manpower shortage का है। इसलिए विवाद का केंद्र यही है कि राशन कार्ड verification जैसे प्रशासनिक काम के लिए शिक्षकों की तैनाती किस हद तक उचित है और इससे स्कूलों की नियमित academic activities पर कितना प्रभाव पड़ेगा।
क्या छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस आदेश से कितने स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित होगी। हालांकि, teachers और education groups ने चिंता जताई है कि यदि पर्याप्त replacement व्यवस्था नहीं हुई तो classes और upcoming examinations को manage करना मुश्किल हो सकता है।
आदेश के अनुसार, संबंधित स्कूलों के principals को शिक्षकों की अनुपस्थिति के दौरान व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासन का उद्देश्य राशन कार्ड applications के verification को जल्द पूरा करना बताया गया है।
Punjab में Teachers को गैर-शैक्षणिक काम देने का विवाद नया नहीं
लुधियाना में सामने आया यह मामला पहली बार नहीं है जब पंजाब के सरकारी शिक्षक गैर-शैक्षणिक सरकारी कार्यों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
इससे पहले भी पंजाब के शिक्षक संगठनों ने BLO duty, census work, drug census और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़े कामों में शिक्षकों की तैनाती पर चिंता जताई है। अप्रैल 2026 में भी teachers ने कहा था कि ऐसी duties के कारण government schools की academic activities और enrolment work प्रभावित हो रहा है।
Bottom Line
लुधियाना में 658 सरकारी शिक्षकों को राशन कार्ड applications के verification के लिए लगाने का फैसला अब विवाद का विषय बन गया है। प्रशासन इसे staff shortage के बीच जरूरी व्यवस्था बता रहा है, जबकि शिक्षक संगठनों का कहना है कि internal examinations के समय ऐसी गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से स्कूलों में staff shortage और बढ़ सकती है।
नोट: अलग-अलग रिपोर्टों में तैनात शिक्षकों की संख्या 658 और 686 बताई गई है। इस खबर में जिला प्रशासन/Indian Express की रिपोर्ट में दी गई 658 शिक्षकों की संख्या को आधार बनाया गया है।