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BRICS Summit 2026 में भारत का बड़ा प्लान! BRICS देशों की Digital Currency होगी Link?

नई दिल्ली BRICS Digital Currency: इस हफ्ते होने वाले समिट में भारत BRICS देशों की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDCs) को क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट के लिए आपस में जोड़ने पर जोर देगा. 

भारत, जो 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है, नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit 2026 में सीमा-पार डिजिटल भुगतान और Central Bank Digital Currency यानी CBDC के संभावित इस्तेमाल पर चर्चा आगे बढ़ा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत BRICS देशों के CBDC को आपस में जोड़ने के विकल्प पर जोर दे रहा है।

 बातचीत से जुड़े दो सूत्रों ने बताया कि ऐसा राजनीतिक और तकनीकी रुकावटों के बावजूद किया जा रहा है. इस साल BRICS की अध्यक्षता भारत कर रहा है और इस ग्रुप के नेताओं की बैठक 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होनी है.

BRICS Digital Currency का भारत का Plan क्या है?

भारत का मौजूदा प्रस्ताव एक नई BRICS Digital Currency बनाने के बजाय अलग-अलग देशों की डिजिटल करेंसी के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने पर केंद्रित है।

CBDC किसी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी की जाने वाली डिजिटल मुद्रा होती है। भारत में इसका उदाहरण Digital Rupee है। इसी तरह दूसरे BRICS देश अपनी-अपनी डिजिटल मुद्रा और भुगतान प्रणालियों पर काम कर रहे हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने अगस्त 2026 में कहा था कि BRICS देशों के बीच fast payment systems और CBDC को जोड़ने के अलग-अलग विकल्पों पर चर्चा चल रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि मामला अभी चर्चा के स्तर पर है।

इसलिए इसे “BRICS की नई मुद्रा लॉन्च” कहना अभी सही नहीं होगा।

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CBDC को Link करने से क्या फायदा होगा?

अगर BRICS देशों की डिजिटल भुगतान प्रणालियां तकनीकी और नियामकीय स्तर पर आपस में जुड़ पाती हैं, तो सीमा-पार भुगतान को आसान बनाने में मदद मिल सकती है। इस सिस्टम में भारत का डिजिटल रुपया, चीन का डिजिटल युआन और रूस का डिजिटल रूबल एक साझा क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम से जुड़ेंगे। 

इसका फायदा सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रह सकता। भविष्य में व्यापार, प्रेषण और अन्य सीमा-पार भुगतान में तेज और अधिक सीधे डिजिटल लेनदेन संभव हो सकते हैं।

हालांकि, इसके लिए केवल तकनीकी कनेक्शन पर्याप्त नहीं होगा। अलग-अलग देशों के नियम, डेटा सुरक्षा, पहचान सत्यापन और भुगतान संबंधी कानूनों में तालमेल भी जरूरी होगा।

BRICS Payment System में क्या बदलाव आ सकता है?

BRICS digital payment से जुड़ी चर्चाओं में एक महत्वपूर्ण विचार सदस्य देशों के मौजूदा राष्ट्रीय भुगतान नेटवर्क को आपस में जोड़ना है।

भारत के लिए यहां UPI और Digital Rupee महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। भारत पहले से ही UPI को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने और स्थानीय मुद्रा में सीमा-पार भुगतान बढ़ाने पर काम कर रहा है।

RBI ने भी BRICS के संदर्भ में fast payment systems और CBDC linkages को संभावित विकल्प बताए हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि एक नया BRICS payment system तुरंत शुरू हो जाएगा। बल्कि उद्देश्य मौजूदा प्रणालियों के बीच interoperability विकसित करना हो सकता है।

क्या BRICS की नई Currency आएगी?

फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं है कि BRICS ने अपनी साझा मुद्रा लॉन्च कर दी है।

यह अंतर समझना जरूरी है:

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CBDC: किसी देश की केंद्रीय बैंक द्वारा जारी डिजिटल मुद्रा।
BRICS Payment System: सदस्य देशों के भुगतान नेटवर्क को जोड़ने की संभावित व्यवस्था।
Common BRICS Currency: सभी सदस्य देशों के लिए एक साझा मुद्रा, जिसका इस्तेमाल एक सामान्य मुद्रा की तरह हो।

2026 में चर्चा मुख्य रूप से पहले दो क्षेत्रों पर है। भारत की मौजूदा पहल का उद्देश्य सीमा-पार भुगतान को आसान बनाना और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, न कि तत्काल कोई नई BRICS currency जारी करना।

BRICS Summit 2026 में इस पर क्या चर्चा होगी?

भारत के लिए CBDC और डिजिटल भुगतान पर सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि BRICS का विस्तार हो चुका है और अलग-अलग सदस्य देशों की वित्तीय प्रणालियां काफी अलग हैं। सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि क्या सदस्य देश तकनीकी मानकों और मुद्रा विनिमय से जुड़े मुद्दों पर सहमति बना पाते हैं।

इसलिए BRICS Digital Currency 2026 को फिलहाल एक संभावित डिजिटल भुगतान सहयोग के रूप में देखना ज्यादा सही है, न कि नई साझा मुद्रा के रूप में। यदि CBDC और payment systems को जोड़ने पर ठोस सहमति बनती है, तो यह BRICS के भीतर cross-border payments को बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

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