लोड हो रहा है...
नई दिल्ली 32°C
होम > India > News > Gujarat Rainfall Deficit 2026 बारिश ने बढ़ाई टेंशन! 11 जिलों में 50% तक कमी, देवभूमि द्वारका सबसे ज्यादा प्रभावित
India

Gujarat Rainfall Deficit 2026 बारिश ने बढ़ाई टेंशन! 11 जिलों में 50% तक कमी, देवभूमि द्वारका सबसे ज्यादा प्रभावित

गुजरात में मानसून की तस्वीर इस बार बेहद गड़बड़ नजर आ रही है। कहीं भारी बारिश ने आँकड़ों को ऊपर खींच दिया, तो कई जिलों में बादल आए लेकिन पानी बरसाने में कंजूसी कर गए। अगस्त खत्म होते-होते Gujarat rainfall deficit 2026 ने किसानों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के 34 जिलों में से 11 जिले ऐसे हैं, जहाँ सामान्य बारिश के मुकाबले करीब 50 फीसदी या उससे अधिक की कमी दर्ज की गई है।

राज्य का औसत आँकड़ा पहली नजर में बहुत डरावना नहीं लगता। लेकिन यही औसत गुजरात के अलग-अलग हिस्सों की असली तस्वीर छिपा रहा है। दक्षिण गुजरात में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई, जबकि कच्छ, सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात के कई हिस्से सूखे जैसे हालात से जूझ रहे हैं।

राज्य के आँकड़ों के मुताबिक अगस्त के अंत तक गुजरात ने अपनी मौसमी सामान्य बारिश का करीब 75 फीसदी हिस्सा दर्ज किया है। वहीं दक्षिण गुजरात में बारिश सामान्य से ऊपर पहुँच गई, जबकि कच्छ में यह करीब 29 फीसदी के आसपास रही।

जिला-वार तस्वीर देखें तो Gujarat rain deficit districts की सूची में कई नाम चौंकाने वाले हैं। देवभूमि द्वारका में सामान्य बारिश का केवल करीब 6 फीसदी हिस्सा दर्ज हुआ है। इसके बाद पोरबंदर में करीब 18 फीसदी, कच्छ में करीब 29 फीसदी और जामनगर में करीब 29 फीसदी बारिश दर्ज की गई। गिर सोमनाथ, साबरकांठा और अरावली में भी बारिश सामान्य से काफी पीछे है। राजकोट में करीब 47 फीसदी और छोटा उदयपुर में करीब 51 फीसदी सामान्य बारिश दर्ज होने की रिपोर्ट है।

ALSO READ  SSC JHT Re-exam 2026: Noida Centre पर फिर Exam, Admit Card ऐसे करें Check

कुछ रिपोर्टों में 12 गुजरात जिलों को देश के सबसे ज्यादा बारिश की कमी वाले 25 जिलों में शामिल बताया गया है। इनमें देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर, कच्छ, अरावली, गिर सोमनाथ और राजकोट प्रमुख हैं। सबसे ज्यादा चिंता Devbhumi Dwarka rainfall deficit को लेकर है। यहाँ सामान्य मौसमी बारिश के मुकाबले कमी 90 फीसदी से भी ज्यादा बताई गई है। अगस्त के अंत तक जिले में सामान्य बारिश का केवल लगभग 6 फीसदी हिस्सा दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई है।

यानी जिस समय मानसून अपने अंतिम दौर में पहुँच रहा है, उस समय भी देवभूमि द्वारका के लिए बड़ी बारिश का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। सरकार ने पानी की ज़रूरत को देखते हुए देवभूमि द्वारका और पोरबंदर के लिए SAUNI योजना के जरिए पानी उपलब्ध कराने की घोषणा भी की है।

Gujarat farmers rain shortage का सबसे सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। सौराष्ट्र और कच्छ में मूँगफली, कपास और दूसरी वर्षा-आधारित फसलों के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी बेहद जरूरी है। लंबे समय तक बारिश नहीं होने पर फसल की बढ़वार, फूल और दाने बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

हालांकि सितंबर में बारिश की गुंजाइश पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक बड़ी बारिश की संभावना कम ज़रूर है, लेकिन शून्य नहीं। ऐसे में गुजरात के किसानों की नजर अब मानसून के आखिरी दौर पर टिकी है। एक तरफ दक्षिण गुजरात बारिश से लबालब है, दूसरी तरफ सौराष्ट्र और कच्छ आसमान की ओर देख रहे हैं। यही असमानता इस साल के Gujarat monsoon 2026 की सबसे बड़ी कहानी बन गई है।

ALSO READ  जयपुर के सरकारी स्कूल पर बड़ा फैसला! जर्जर बिल्डिंग पर चला Bulldozer, ₹18 लाख से बनेगा नया भवन

Source

Scroll to Top