रोहतक: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है। हरियाणा के रोहतक स्थित हाई–सिक्योरिटी Sunaria Jail में बंद राम रहीम को 21 दिनों की अस्थायी छुट्टी यानी फरलो (Furlough) दी गई है। गुरमीत राम रहीम 21 दिन फरलो मिलने के बाद मंगलवार सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जेल से निकला और सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय के लिए रवाना हुआ।
Gurmeet Ram Rahim latest news के अनुसार, 2020 के बाद से यह 17वीं बार है जब दुष्कर्म और हत्या के मामलों में सजा काट रहा डेरा प्रमुख जेल की सलाखों से बाहर आया है। Ram Rahim furlough 2026 की इस नई राहत ने एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
2026 में तीसरी बार अस्थायी रिहाई: टाइमलाइन पर एक नज़र
गंभीर अपराधों में 20 साल की सजा काट रहे डेरा प्रमुख को इस साल बार–बार बाहर आने की अनुमति मिली है:
- जनवरी 2026: साल की शुरुआत में उसे 40 दिन की पैरोल दी गई थी।
- मई 2026: इसके बाद मई में 30 दिन की Ram Rahim parole मंजूर हुई, जिसे पूरा कर वह 26 जून को वापस जेल लौटा था।
- अगस्त 2026: अब जेल लौटने के ठीक दो महीने के भीतर उसे Ram Rahim 21 day furlough मिल गई है।
आधिकारिक जेल रिकॉर्ड (कैदी संख्या 8647/C) के मुताबिक, अक्टूबर 2020 से लेकर अब तक कुल 17 बार उसे पैरोल या फरलो की सुविधा मिल चुकी है।
आखिर क्यों और किस नियम के तहत मिल रही बार–बार रिहाई?
विपक्ष और सामाजिक संगठनों द्वारा बार–बार उठाए जाने वाले सवालों के बीच जेल प्रशासन और कानूनी विशेषज्ञों ने इसके पीछे के नियमों को स्पष्ट किया है:
- हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स एक्ट, 2022: राम रहीम की यह रिहाई ‘हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेम्परेरी रिलीज) एक्ट, 2022′ के तहत की जा रही है।
- सालाना कोटा (Yearly Quota): कानून के अनुसार, जेल में अच्छा आचरण (Good Conduct) रखने वाले पात्र सजायाफ्ता कैदियों को एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम 70 दिन की पैरोल और 21 दिन की फरलो लेने का अधिकार है।
- फरलो और पैरोल में अंतर: पैरोल किसी खास आपात स्थिति, पारिवारिक कारण या बीमारी के आधार पर दी जाती है, जबकि फरलो एक प्रकार की नियमित छुट्टी होती है जो कैदी को पारिवारिक और सामाजिक संबंध बनाए रखने के लिए बिना किसी आपात कारण के भी मिलती है।
प्रशासन का कहना है कि नियमों के अनुसार पात्रता पूरी करने और स्थानीय प्रशासन की अनापत्ति (NOC) मिलने के बाद ही सक्षम प्राधिकारी द्वारा यह मंजूरी दी जाती है।
विपक्ष का हमला और राजनीतिक सवाल
इतने गंभीर अपराधों के दोषी को बार–बार जेल से बाहर भेजे जाने को लेकर विरोधी दलों ने कड़ा ऐतराज जताया है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए डेरा प्रमुख को रियायतें दी जाती हैं।
हालांकि, सरकारी पक्ष का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी दायरे में है और किसी भी सजायाफ्ता कैदी को जेल मैनुअल के नियमों के तहत ही अधिकार दिए जाते हैं।