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नेपाल में तबाही के बाद हिमाचल पर मंडराया GLOF का खतरा! 669 ग्लेशियल झीलों ने बढ़ाई चिंता

नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर से जुड़ी विनाशकारी बाढ़ के बाद हिमालयी राज्यों में ग्लेशियल झीलों से आने वाली बाढ़ का खतरा Himachal GLOF alert 2026 एक बार फिर चर्चा में है। हिमाचल प्रदेश में भी संभावित Glacial Lake Outburst Flood (GLOF) को लेकर चिंता बढ़ी है। राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश का आपदा प्रबंधन विभाग ऐसी संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार है।

नेपाल की तबाही के बाद हिमाचल पर क्यों बढ़ी चिंता?

नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में हालिया फ्लैश फ्लड ने पूरे हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और ग्लेशियल झीलों से जुड़े खतरों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस घटना में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में भी Himachal flash flood risk को लेकर सतर्कता ज़रूरी मानी जा रही है।

ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से ऊँचाई वाले क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों का आकार बढ़ सकता है। अगर किसी झील की प्राकृतिक सीमा टूट जाती है, तो अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर तेजी से बह सकता है। इसे ही Glacial Lake Outburst Flood यानी GLOF कहा जाता है।

हालिया रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में ग्लेशियल झीलों की संख्या में पिछले कुछ दशकों में काफी बढ़ोतरी हुई है। The New Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में ग्लेशियल झीलों की संख्या 1990 में 107 से बढ़कर 2024 में 669 हो गई है, जबकि इन झीलों का संयुक्त सतही क्षेत्रफल भी दोगुने से अधिक बढ़ा है।

यही वजह है कि glacial lake danger को लेकर वैज्ञानिक और आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार निगरानी और जोखिम कम करने पर जोर दे रही हैं।

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नेपाल में हुई तबाही पर चिंता जताते हुए हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

GLOF के खतरे को लेकर पूछे गए सवाल पर राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का Disaster Management Department ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की आपदाओं की संभावना गंभीर चिंता का विषय है।

हिमाचल में GLOF के खतरे को लेकर चिंता सिर्फ नेपाल की घटना के बाद नहीं बढ़ी है। राज्यपाल की टिप्पणी एक हालिया संयुक्त रिपोर्ट के संदर्भ में भी आई है, जिसे IIT रोपड़ और University of Technology Sydney के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश समेत व्यापक हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियल झीलों से अचानक बाढ़ आने के खतरे की ओर ध्यान दिलाया गया था।

विशेषज्ञों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों 

नेपाल-तिब्बत में हुई भयावह बाढ़ ने एक बार फिर दिखाया है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और ग्लेशियल झीलों से जुड़े खतरे कितने गंभीर हो सकते हैं। हिमाचल प्रदेश में भी ग्लेशियल झीलों की बढ़ती संख्या के बीच Himachal GLOF alert 2026 को लेकर सतर्कता बढ़ना स्वाभाविक है।

राज्य सरकार की ओर से सिस्टम को तैयार बताया गया है, लेकिन बदलते मौसम और ग्लेशियरों पर बढ़ते दबाव के बीच वैज्ञानिक निगरानी, मज़बूत और स्थानीय स्तर पर तैयारी ही संभावित नुकसान को कम करने में सबसे अहम साबित होगी।

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