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J&K में 70 लाख Land Records होंगे Digital, किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा

जम्मू-कश्मीर में करीब 70 लाख जमीन के पार्सल को डिजिटल और अपडेट करने का काम तेज कर दिया गया है। राजस्व विभाग की इस कवायद में अब तक 13 लाख से ज्यादा रिकॉर्ड में गड़बड़ियां सुधारी जा चुकी हैं। डिजिटल रिकॉर्ड को केंद्र के एग्रीस्टैक से जोड़ने की तैयारी है, जिससे किसानों को सरकारी योजनाओं, सब्सिडी, कृषि ऋण, बीमा और दूसरी सेवाओं का लाभ लेने में आसानी हो सकती है। 

जम्मू-कश्मीर में जमीन से जुड़े पुराने कागजी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप देने की दिशा में बड़ा काम चल रहा है। राजस्व विभाग ने बीआईएसएजी-एन के सहयोग से करीब 70 लाख लैंड पार्सल के रिकॉर्ड को डिजिटल और अपडेट करने की प्रक्रिया तेज की है। यह काम केंद्र के J&K लैंड रिकॉर्ड्स डिजिटल 2026 से जुड़े व्यापक डिजिटल प्रशासन और डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम यानी डीआईएलआरएमपी के तहत किया जा रहा है। खास बात यह है कि यह सिर्फ पुराने कागजों को स्कैन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि रिकॉर्ड की जांच, सुधार और सत्यापन भी किया जा रहा है। 

इस पूरी प्रक्रिया में 2,500 से ज्यादा राजस्व कर्मचारियों को डेटा दर्ज करने, रिकॉर्ड की जाँच करने और मंजूरी देने के लिए भूमिका के हिसाब से एक्सेस दिया गया है। रिकॉर्ड में गलती मिलने पर उसे सुधारने की व्यवस्था भी रखी गई है। अधिकारियों के अनुसार, अब तक 13 लाख से ज्यादा गड़बड़ियों को ठीक किया जा चुका है। इसके अलावा करीब सात लाख लंबित म्यूटेशन को भी सत्यापन और मंजूरी के बाद डिजिटल रिकॉर्ड ऑफ राइट्स में शामिल किया गया है। 

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J&K लैंड रिकॉर्ड्स ऑनलाइन व्यवस्था का एक अहम उद्देश्य जमीन के रिकॉर्ड को ज्यादा भरोसेमंद और आसानी से उपलब्ध बनाना है। इसके लिए गांव के हिसाब से जमीन का व्यवस्थित डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। रिकॉर्ड की एंट्री के बाद उसकी जांच और मंजूरी के लिए अलग-अलग स्तर रखे गए हैं। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर और किस अधिकारी ने किया। 

जमीन मालिकों के लिए एक और महत्वपूर्ण सुविधा सार्वजनिक जांच से जुड़ी है। अधिकारियों के मुताबिक 7000 से ज्यादा गांव स्तर के कैंप लगाए गए, जहाँ करीब  जमाबंदी पढ़कर सुनाई गई और लोगों को नाम, हिस्सेदारी तथा म्यूटेशन से जुड़ी गलतियां बताने का मौका दिया गया। डिजिटल रिकॉर्ड JK जमीन सुधार पोर्टल पर भी सार्वजनिक देखने के लिए उपलब्ध कराए गए हैं।

अब इस डिजिटल डेटाबेस को केंद्र के एग्रीस्टैक जम्मू-कश्मीर ढाँचे के साथ जोड़ने की तैयारी है। एग्रीस्टैक में फार्मर्स रजिस्ट्री, जियो-रेफरेंस्ड गांव के नक्शे और क्रॉप सॉन रजिस्ट्री जैसे डिजिटल सिस्टम शामिल हैं। इसका मकसद किसान और उसकी जमीन की सही जानकारी को एक डिजिटल ढाँचे में जोड़ना है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने एग्रीस्टैक के लिए पहले ही एक इंप्लीमेंटेशन कमेटी गठित कर रखी है, जिसमें कृषि, राजस्व, आईटी और सर्वे-लैंड रिकॉर्ड से जुड़े विभाग शामिल हैं। 

इस काम में एक खास चुनौती पुराने जमाबंदी रिकॉर्ड की है, क्योंकि एक ही खसरा नंबर में कई सह-मालिकों के नाम दर्ज हो सकते हैं। इसलिए अब यह दर्ज किया जा रहा है कि प्रत्येक मालिक के हिस्से में वास्तव में कितनी जमीन आती है। अब तक करीब 33 लाख खसरा रिकॉर्ड को इसी ओनर-एक्सटेंट फॉर्मेट में बदला जा चुका है। 

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फार्मर आईडी जम्मू-कश्मीर व्यवस्था में जमीन मालिक ई-केवाईसी के जरिए अपनी पहचान सत्यापित कर सकेंगे। इसके बाद वे अपनी जमीन की जानकारी देख सकेंगे, संबंधित लैंडहोल्डिंग ग्रुप का दावा कर सकेंगे और स्वैच्छिक इलेक्ट्रॉनिक सहमति दे सकेंगे। जरूरी सत्यापन और मंजूरी पूरी होने के बाद फार्मर आईडी तैयार की जाएगी। 

इसका सबसे बड़ा फायदा किसानों को सरकारी सेवाओं तक पहुँच में मिल सकता है। डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स कश्मीर और जम्मू संभाग में जमीन की जानकारी आसानी से उपलब्ध होने से पटवारी और तहसील कार्यालयों के बार-बार चक्कर कम हो सकते हैं। वहीं एग्रीस्टैक और फार्मर आईडी के जरिए पात्र किसानों तक सरकारी योजनाओं, सब्सिडी, कृषि इनपुट, कर्ज, फसल बीमा, खरीद सेवाओं और आपदा राहत जैसी सुविधाएं ज्यादा व्यवस्थित तरीके से पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। 

यानी J&K लैंड रिकॉर्ड्स डिजिटाइजेशन सिर्फ जमीन के कागजों को ऑनलाइन करने की कवायद नहीं है। इसका अगला लक्ष्य जमीन के रिकॉर्ड को किसान की डिजिटल पहचान से जोड़कर ऐसा डेटाबेस तैयार करना है, जिसमें रिकॉर्ड ज्यादा पारदर्शी, सत्यापित और आसानी से इस्तेमाल किए जा सकें। 

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