तमिलनाडु में कावेरी डेल्टा के किसानों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। वजह है Mettur dam water release 2026 को लेकर सरकार का फैसला। तमिलनाडु सरकार ने मेत्तूर बांध से 1 सितंबर 2026 से 45 दिनों तक पानी छोड़ने का निर्णय लिया है। लेकिन अब इसी अवधि को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या इतने कम समय का पानी सांबा धान की पूरी फसल के लिए पर्याप्त होगा?
माकपा के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सांबा फसल के लिए लंबे समय तक भरोसेमंद पानी की ज़रूरत होती है। उनके मुताबिक केवल 45 दिन पानी छोड़ने से कावेरी डेल्टा के किसानों को नुकसान हो सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसा फैसला भविष्य में कावेरी जल बँटवारे के मुद्दे पर कर्नाटक के पक्ष को मज़बूत करने का आधार बन सकता है।
सरकार के फैसले के अनुसार Mettur dam September 1 से डेल्टा सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 1 सितंबर को मेत्तूर बांध से पानी छोड़ेंगे। यह फैसला ऐसे समय आया है जब कावेरी बेसिन में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अपेक्षित बारिश नहीं होने और बांध में सीमित जल उपलब्धता की चिंता बनी हुई है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक 2026-27 सिंचाई वर्ष की शुरुआत में मेत्तूर बांध में उपयोग योग्य पानी करीब 42 टीएमसी था। साथ ही कर्नाटक से अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं मिलने की स्थिति और बांध में न्यूनतम जल भंडार बनाए रखने की ज़रूरत को भी ध्यान में रखा गया।
कावेरी डेल्टा में धान की खेती के लिए पानी सिर्फ खेत में शुरुआती सिंचाई तक सीमित नहीं रहता। फसल के अलग-अलग चरणों में लगातार पानी की जरूरत होती है। यही वजह है कि Mettur dam 45 day water release को लेकर किसान संगठनों और राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज हो गई है।
शनमुगम का कहना है कि सांबा फसल को करीब 120 दिनों की सुनिश्चित जल आपूर्ति चाहिए। ऐसे में 45 दिनों की रिलीज किसानों को बीच फसल में पानी की कमी के जोखिम में डाल सकती है। उन्होंने सरकार से डेल्टा किसानों के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की माँग की है।
यह मामला सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। Tamil Nadu Cauvery water 2026 का मुद्दा पहले से ही तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच संवेदनशील बना हुआ है। शनमुगम ने आशंका जताई है कि यदि तमिलनाडु अपनी सिंचाई जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त पानी का इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो भविष्य में कर्नाटक की ओर से तमिलनाडु के हिस्से के पानी को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं। हालांकि यह फिलहाल उनका राजनीतिक दावा है, जिसकी कानूनी या न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है।
सरकार ने पानी छोड़ने का फैसला बांध में उपलब्ध जल, आने वाली जल आवक, पेयजल ज़रूरतों और डेल्टा सिंचाई को ध्यान में रखकर किया है। साथ ही किसानों को पानी का इस्तेमाल सावधानी और योजना के साथ करने की सलाह दी गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सितंबर से शुरू होने वाला पानी Cauvery delta farmers की धान की फसल को कितना सहारा दे पाएगा। अगर आगे बांध में पानी की आवक बेहतर होती है, तो स्थिति बदल सकती है। लेकिन अगर जलस्तर नहीं बढ़ा, तो 45 दिनों की सीमा तमिलनाडु के Tamil Nadu paddy farmers के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।