पुणे के मंझरी स्थित आदिवासी छात्रावास में छात्रों का विरोध प्रदर्शन 16वें दिन भी जारी है। छह छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं और छात्रों ने सरकार से मौखिक आश्वासन के बजाय अपनी हर माँग पर लिखित GR (Government Resolution) जारी करने की माँग की है। छात्रों का कहना है कि फर्जी प्रमाणपत्र, कंडीशनल वैलिडिटी, DBT व्यवस्था, PESA भर्ती और 12,500 रिक्त पदों जैसे मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय और समयसीमा ज़रूरी है। वहीं, सरकार का कहना है कि कुछ माँगों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है, जबकि कुछ मामलों में दूसरे विभागों के साथ समन्वय और कानूनी प्रक्रिया के कारण समय लग सकता है।
Pune tribal hostel protest के तहत मंझरी छात्रावास परिसर में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। रिपोर्ट के अनुसार, छह छात्र भूख हड़ताल पर हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार को लिखित आश्वासन देने की माँग की है। छात्रों का कहना है कि पहले भी उन्हें कई बार मौखिक आश्वासन दिए गए, लेकिन जमीन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
आंदोलन के दौरान छात्रों ने कैरम और शतरंज खेलकर तथा देशभक्ति गीत गाकर अपना विरोध जारी रखा। छात्रों ने अपनी माँगों को लेकर नारे भी लगाए और स्पष्ट किया कि लिखित निर्णय मिलने तक आंदोलन जारी रह सकता है।
Manjari tribal hostel protest के बीच शुक्रवार को छात्रावास परिसर में पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मनोज पाटील, डीसीपी जीवन बेनीवाल और डीसीपी प्रशांत अमृतकर ने प्रदर्शन स्थल का दौरा कर छात्रों से बातचीत की। पुलिस वैन और एंबुलेंस भी मौके पर पहुँचीं।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि उनकी मौजूदगी का उद्देश्य छात्रों पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि लंबे समय से भूख हड़ताल कर रहे छात्रों के स्वास्थ्य की जानकारी लेना और उन्हें सावधानी बरतने की अपील करना था। छात्रों की माँगों को पुलिस आयुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुँचाने की बात भी कही गई।
हालांकि, छात्रों ने पुलिस तैनाती पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि पुलिस भेजने के बजाय मुख्यमंत्री को स्वयं छात्रों से बातचीत करनी चाहिए।
छात्रों की मुख्य आपत्ति सरकार की ओर से दिए गए मौखिक आश्वासनों को लेकर है। 24 अगस्त को आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके के साथ हुई बैठक के बाद छात्रों को कुछ माँगों पर कार्रवाई की समयसीमा बताई गई थी।
छात्रों का कहना है कि फर्जी प्रमाणपत्र और कंडीशनल वैलिडिटी जैसे मुद्दों के समाधान के लिए बताई गई समयसीमा पर्याप्त या व्यावहारिक नहीं है। इसलिए वे हर माँग के लिए अलग समाधान चाहते हैं।
Maharashtra tribal students hunger strike में DBT व्यवस्था को खत्म कर छात्रावासों में भोजन उपलब्ध कराने की माँग भी प्रमुख है। छात्रों का तर्क है कि एकमुश्त राशि मिलने के बाद कई विद्यार्थी उसका प्रभावी प्रबंधन नहीं कर पाते।
इसके अलावा PESA भर्ती और 12,500 रिक्त पदों को भरने की माँग भी आंदोलन का हिस्सा है। आदिवासी विकास विभाग का कहना है कि कुछ माँगों के लिए दूसरे विभागों से समन्वय ज़रूरी है और कुछ मामलों में कानूनी प्रक्रिया के कारण समय लग सकता है।
सरकार ने छात्रों से भूख हड़ताल और प्रदर्शन वापस लेने की अपील की है। विभाग का कहना है कि छात्रों की कई माँगों पर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। दूसरी ओर, छात्र लिखित GR मिलने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
अब tribal hostel demands 2026 को लेकर सरकार के अगले कदम पर नजर है। आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा फिलहाल यही है कि छात्रों को मौखिक आश्वासन के बजाय उनकी माँगों पर आधिकारिक और लिखित निर्णय कब मिलता है।