नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता देने की प्रक्रिया को गति देने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। सरकार ने नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम अधिसूचित करते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जिला कलेक्टरों को नागरिकता आवेदन प्राप्त करने, उनकी जांच करने और अंतिम निर्णय लेने
के अधिकार सौंप दिए हैं।
इस महत्वपूर्ण संशोधन के बाद अब CAA citizenship 2026 की प्रक्रिया के तहत आवेदकों को लंबे समय तक सशक्त समितियों के
फैसलों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। CAA latest news के मुताबिक, गृह मंत्रालय का यह कदम प्रक्रिया में होने वाली
प्रशासनिक देरी को खत्म करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
8 राज्यों में CAA के तहत किन क्षेत्रों को शामिल किया गया?
गृह मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, यह नया अधिकार मुख्य रूप से सीमावर्ती और शरणार्थी आबादी वाले राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया है:
- शामिलराज्य और केंद्र शासित प्रदेश: गुजरात, राजस्थान, पंजाब, CAA West Bengal, CAA Assam (गैर-जनजातीय क्षेत्र), त्रिपुरा (गैर-जनजातीय क्षेत्र), CAA Jammu Kashmir और CAA Ladakh।
- जनजातीयक्षेत्रों को छूट: असम और त्रिपुरा के संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले जनजातीय स्वायत्त जिलों को इन नियमों के दायरे से बाहर रखा गया है।
यह भी पढ़ें —झारखंड छात्र आंदोलन: हेमंत सोरेन सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा क्यों रद्द की? छात्रों की मांगें क्या थीं
CAA Rules 2026: जिला कलेक्टर CAA की क्या होंगी नई शक्तियां?
नागरिकता नियम, 2009 के नियम 11A में किए गए नए संशोधनों के तहत जिला कलेक्टर CAA को धारा 6B के तहत ‘सक्षम प्राधिकारी’ बनाया गया है:
- आवेदनऔर पावती: आवेदक द्वारा इलेक्ट्रॉनिक रूप से आवेदन जमा करने के बाद प्रणाली द्वारा फॉर्म IX (Form IX) में पावती जारी की जाएगी।
- दस्तावेजोंका भौतिक सत्यापन: संबंधित जिला कलेक्टर प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच करेंगे और आवेदक की उपयुक्तता तय करने के लिए आवश्यक जांच (inquiry) करा सकेंगे।
- निष्ठाकी शपथ और नागरिकता: आवेदक की पात्रता से संतुष्ट होने पर कलेक्टर नागरिकता अधिनियम की दूसरी अनुसूची के तहत निष्ठा की शपथ दिलाएंगे और भारत की नागरिकता प्रदान करेंगे।
- अनुपस्थितिपर आवेदन निरस्त: यदि पर्याप्त अवसर दिए जाने के बाद भी कोई आवेदक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर शपथ लेने या प्रक्रिया पूरी करने में विफल रहता है, तो कलेक्टर को उसका आवेदन खारिज करने का अधिकार होगा।
CAA में नागरिकता: पहले क्या थी व्यवस्था और क्यों हुआ बदलाव?
नागरिकता संशोधन कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए 6 गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) को नागरिकता देने का प्रावधान है।
- पुरानीव्यवस्था: अब तक नागरिकता देने का अधिकार जनगणना, आईबी और डाक विभाग के अधिकारियों वाली ‘सशक्त समितियों’ और जिला स्तरीय समितियों के पास था।
- बदलावका कारण: इन समितियों के स्तर पर आवेदनों की जांच और मंजूरी की गति काफी धीमी थी।
- पेंडिंगमामलों का ट्रांसफर: गृह मंत्रालय के ताजा आदेश के अनुसार, इन 8 क्षेत्रों में समितियों के पास जितने भी लंबित आवेदन हैं, उन्हें तत्काल संबंधित जिला कलेक्टरों को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया है।
Citizenship Amendment Act के क्रियान्वयन को मिलेगी गति
गृह मंत्रालय द्वारा शक्तियों के विकेंद्रीकरण से सीमावर्ती राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, असम, राजस्थान और पंजाब में शरणार्थियों के नागरिकता प्रमाणपत्र जारी करने में तेजी आएगी। Citizenship Amendment Act के तहत जिला स्तर पर सीधे प्रशासनिक अधिकार मिलने से आवेदकों को स्थानीय स्तर पर ही सत्यापन और शपथ ग्रहण की सुविधा मिल सकेगी।