Mirzapur School Road: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में स्कूल तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क की मांग को लेकर 400 से ज्यादा स्कूली बच्चों ने प्रदर्शन किया। मामला सिटी ब्लॉक के चेरुईराम कंपोजिट विद्यालय का है, जहां छात्रों का कहना है कि स्कूल पहुंचने के लिए उन्हें खेतों की मेड़ और कच्चे रास्ते से करीब एक किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। बारिश के मौसम में यह रास्ता कीचड़ और पानी से भर जाने के कारण परेशानी और बढ़ जाती है।
सोमवार को स्कूल खुलने के समय छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने विद्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि स्कूल तक आने-जाने के लिए जल्द से जल्द पक्का रास्ता बनाया जाए। अधिकारियों के मौके पर पहुंचने के बाद रास्ता बनाने को लेकर आश्वासन दिया गया।
Mirzapur के स्कूल में बच्चों ने क्यों किया प्रदर्शन?
चेरुईराम कंपोजिट विद्यालय तक पहुंचने के लिए उचित सड़क नहीं होने की समस्या लंबे समय से बताई जा रही है। छात्रों के अनुसार, उन्हें मुख्य रास्ते से उतरने के बाद खेतों की मेड़ के सहारे पैदल स्कूल तक पहुंचना पड़ता है।
बारिश के दौरान रास्ते में पानी और कीचड़ जमा हो जाता है। इससे बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है और फिसलने का खतरा भी रहता है।
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, वाहन भी स्कूल के काफी पहले रोकना पड़ता है और उसके बाद पैदल रास्ते से विद्यालय तक जाना पड़ता है।
400 से ज्यादा छात्रों ने उठाई सड़क की मांग
7 सितंबर को स्कूल के बाहर 400 से अधिक छात्रों ने प्रदर्शन किया। उनके साथ अभिभावक और शिक्षक भी मौजूद थे। बच्चों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से स्कूल तक पक्की सड़क बनवाने की मांग की।
कुछ स्थानीय रिपोर्टों में स्कूल में छात्रों की संख्या करीब 450 से 470 बताई गई है। अलग-अलग रिपोर्टों में संख्या अलग होने के कारण इसे सटीक enrollment figure के बजाय लगभग 450+ छात्रों के रूप में देखना उचित है।
बारिश में और मुश्किल हो जाती है स्कूल की राह
स्कूल तक जाने वाले रास्ते की समस्या बारिश के दौरान गंभीर हो जाती है। खेतों के बीच से जाने वाले कच्चे रास्ते पर पानी और कीचड़ जमा होने से बच्चों और शिक्षकों को परेशानी होती है।
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को खराब रास्ते से स्कूल भेजना जोखिम भरा हो सकता है। यही वजह है कि उन्होंने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की।
स्कूल 1985 में बना, लेकिन रास्ते की समस्या बरकरार
रिपोर्टों के मुताबिक, चेरुईराम कंपोजिट विद्यालय की स्थापना 1985 में हुई थी, लेकिन स्कूल तक पहुंचने के लिए उचित रास्ते की समस्या अभी भी बनी हुई है।
GNT की रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल तक वाहन पहुंचने में भी परेशानी होती है और लोगों को करीब एक किलोमीटर पहले वाहन रोकना पड़ता है। खेतों से होकर जाने के कारण फसल को नुकसान पहुंचने की बात भी स्थानीय लोगों की ओर से कही गई है।
प्रशासन ने क्या आश्वासन दिया?
छात्रों के प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों, ग्राम प्रधान और स्थानीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी में स्कूल तक 5 फीट चौड़ा रास्ता बनाने पर सहमति बनने की रिपोर्ट है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों की सहमति के बाद मंगलवार से रास्ते का काम शुरू करने की बात कही गई। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि पहले रास्ता बनाने में जमीन से जुड़ी समस्या आ रही थी, लेकिन अब ग्रामीणों की सहमति से रास्ते के लिए जगह उपलब्ध कराने पर सहमति बनी है।
हालांकि, स्थायी पक्की सड़क कब तक पूरी होगी, इसकी स्पष्ट समयसीमा अभी सामने नहीं आई है।
सड़क की मांग के बाद दर्ज हुई FIR
इस मामले में 8 सितंबर को एक और अपडेट सामने आया है। स्कूल के गेट के सामने प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने सपा नेता समेत कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। शिक्षक की शिकायत में सरकारी काम में बाधा डालने और रास्ता अवरुद्ध करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
यह कार्रवाई सड़क की मांग के मूल मुद्दे से अलग है। इसलिए इसे रिपोर्ट करते समय आरोपों को पुलिस/शिकायत के आधार पर ही प्रस्तुत करना चाहिए और किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं करना चाहिए।
बच्चों की पढ़ाई पर क्या असर पड़ रहा है?
स्कूल तक पहुंचने में परेशानी का सीधा असर छात्रों और शिक्षकों की रोजाना आवाजाही पर पड़ता है। खासकर बारिश में कीचड़ और पानी के कारण स्कूल पहुंचना कठिन हो जाता है।
अगर रास्ते की समस्या का स्थायी समाधान होता है तो इससे छात्रों के साथ-साथ स्कूल स्टाफ को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल प्रशासन की ओर से 5 फीट चौड़ा रास्ता बनाने की दिशा में सहमति की जानकारी सामने आई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रास्ते का निर्माण कितनी जल्दी पूरा होता है और क्या इससे बच्चों को बारिश समेत पूरे साल सुरक्षित पहुंच मिल पाएगी।
निष्कर्ष
मिर्जापुर के चेरुईराम कंपोजिट विद्यालय का मामला ग्रामीण स्कूलों में basic connectivity और education infrastructure की समस्या को सामने लाता है। 400 से ज्यादा बच्चों के प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने स्कूल तक रास्ता बनाने का आश्वासन दिया है। अब छात्रों और अभिभावकों की नजर इस बात पर है कि प्रस्तावित रास्ते का काम वास्तव में कब शुरू होता है और उन्हें स्थायी राहत कब मिलती है।