कर्नाटक लोक सेवा आयोग यानी KPSC से जुड़े कथित भर्ती घोटाले की जाँच अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) तक पहुँच गई है। रविवार, 23 अगस्त को ED ने IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार से जुड़े बेंगलुरु और उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग जाँच के तहत Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के प्रावधानों के तहत की गई।
ज्ञानेंद्र गंगवार का KPSC से क्या कनेक्शन है?
ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार 2016 बैच के कर्नाटक कैडर के IAS अधिकारी हैं। फिलहाल वह कर्नाटक के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में Director-MSME के पद पर तैनात हैं। इससे पहले वह KPSC में परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इस पद से उन्हें मार्च 2026 में हटाया गया था।
यही पूर्व भूमिका ED की कार्रवाई को अहम बनाती है। एजेंसी जिस कथित KPSC भर्ती अनियमितता की मनी-लॉन्ड्रिंग एंगल से जाँच कर रही है, उसमें परीक्षा और चयन प्रक्रिया से जुड़े वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को खंगाला जा रहा है। हालांकि, गंगवार के खिलाफ किसी अपराध का निष्कर्ष अभी जाँच के स्तर पर है और उनकी भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
किस परीक्षा को लेकर है विवाद?
मामला KPSC द्वारा वेटनरी अधिकारी की भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। जनवरी 2026 में 400 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके बाद अभ्यर्थियों की ओर से चयन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के आरोप लगाए गए। आरोपों में पेपर लीक, OMR उत्तर-पुस्तिकाओं से कथित छेड़छाड़ और बिचौलियों के जरिए चयन प्रभावित करने जैसी बातें शामिल हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कर्नाटक सरकार ने जुलाई में मामले की जाँच CID को सौंपी थी। विवाद बढ़ने के बाद KPSC ने वेटनरी अधिकारी की अंतिम चयन सूची को भी रोक दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ अभ्यर्थियों ने चयन में कथित तौर पर भारी रकम के लेनदेन के आरोप लगाए थे।
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ED की जाँच कहाँ तक पहुँची?
ED ने 18 अगस्त को इस मामले में पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए कर्नाटक और अहमदाबाद में 21 परिसरों पर तलाशी ली थी। इनमें KPSC का कार्यालय, निलंबित पूर्व अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार, सदस्य शांता होस्मानी, कथित बिचौलियों, चयनित अभ्यर्थियों और परीक्षा की डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी प्राइवेट संस्था के परिसर शामिल थे।
अब गंगवार से जुड़े परिसरों की पड़ताल का दायरा KPSC की परीक्षा व्यवस्था में पूर्व जिम्मेदारी निभाने वाले वरिष्ठ अधिकारी तक पहुँच गया है। ED का फोकस कथित अपराध से जुड़े पैसों के प्रवाह और संभावित मनी-लॉन्ड्रिंग की कड़ियों की जाँच पर है।
“लापता” होने की खबर पर भी हुआ था विवाद
ED की कार्रवाई से एक दिन पहले गंगवार के कुछ समय तक संपर्क में नहीं होने की खबरों ने भी चर्चा तेज कर दी थी। बाद में कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा था कि गंगवार पारिवारिक आपात स्थिति के कारण उत्तर प्रदेश में अपने पैतृक स्थान पर थे
फिलहाल KPSS परीक्षा घोटाला 2026 मामले में जाँच जारी है। ED की तलाशी के बाद यह देखना अहम होगा कि एजेंसी को कथित भर्ती अनियमितताओं और पैसों के लेनदेन से जुड़े कौन से सबूत मिलते हैं। गंगवार की वास्तविक भूमिका और किसी संभावित वित्तीय अपराध की पुष्टि जाँच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।