झारखंड छात्र आंदोलन: हेमंत सोरेन सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा क्यों रद्द की? छात्रों की मांगें क्या थीं

रांची: झारखंड में पिछले कई हफ्तों से चल रहा छात्रों का व्यापक विरोध प्रदर्शन आखिरकार सरकार के बड़े फैसले के साथ निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। राज्य भर में बढ़ते दबाव और झारखंड छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई आपातकालीन कैबिनेट बैठक में विवादित JSSC CGL परीक्षा रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है।

JSSC CGL ताजा खबर के अनुसार, सरकार ने न केवल संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा को रद्द किया है, बल्कि परीक्षा आयोजित कराने वाली विवादित ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) द्वारा 2014 के बाद से आयोजित सभी परीक्षाओं को निरस्त करने और पूरे मामले की सीआईडी जांच का आदेश दिया है।

हेमंत सोरेन छात्र आंदोलन और परीक्षा रद्द करने की मुख्य वजहें

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) और जेपीएससी (JPSC) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, धांधली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों अभ्यर्थी पिछले 24 दिनों से धरने और आमरण अनशन पर बैठे थे।

सरकार द्वारा परीक्षा रद्द करने के प्रमुख कारण:

  • सीआईडी और एसआईटी की चौंकाने वाली रिपोर्ट: सीआईडी और एसआईटी जांच में परीक्षा संचालन एजेंसी TDPL और बिचौलियों के बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ, जिसके बाद सरकार के पास परीक्षा रद्द करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
  • राजनीतिक दबाव और राहुल गांधी का पत्र: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सहयोगी दल के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर छात्रों के आंदोलन को जायज ठहराया था और संवाद कर समाधान निकालने की अपील की थी।
  • आंदोलन का उग्र रूप: छात्रों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव और राज्य के सभी 24 जिलों में विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया था।
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आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें क्या थीं?

झारखंड छात्र आंदोलन ताजा खबर के मुताबिक, ‘JPSC-JSSC सुधार मंच‘ के बैनर तले छात्र निम्नलिखित मांगों पर अड़े हुए थे:

  • JSSC-CGL व अन्य संदिग्ध परीक्षाओं को रद्द करना: पेपर लीक और अनियमितताओं से प्रभावित JSSC-CGL और JPSC परीक्षाओं को तत्काल निरस्त किया जाए।
  • सीबीआई (CBI) जांच की मांग: भर्ती घोटालों और परीक्षा माफियाओं के नेटवर्क की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जजों की निगरानी में हो।
  • एजेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध: परीक्षाओं में धांधली में शामिल ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को हमेशा के लिए बाहर किया जाए।
  • पारदर्शी परीक्षा कैलेंडर: भविष्य में समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर जारी हो, OMR शीट व आंसर की समय पर सार्वजनिक की जाए।

सरकार के ताजा आदेश और अब क्या है स्थिति?

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कैबिनेट बैठक के बाद स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय सुधार समिति गठित की गई है। इसके साथ ही वर्ष 2014 से अब तक की सभी संदिग्ध परीक्षाओं की व्यापक जांच के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि, JSSC CGL परीक्षा रद्द होने के फैसले का छात्रों ने स्वागत किया है, लेकिन छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक पूरे सिंडिकेट के खिलाफ निष्पक्ष सीबीआई जांच की मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन का अगला चरण जारी रहेगा।

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