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PM Modi बोले- भारत वैश्विक स्पेस सेक्टर में तेजी से बना सकता है जगह, प्राइवेट कंपनियों पर जोर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी की सराहना करते हुए कहा है कि लागत प्रतिस्पर्धा, असीम प्रतिभा और जोखिम लेने की क्षमता के दम पर India global space sector PM Modi के विज़न के अनुरूप दुनिया में बहुत तेजी से अपना शीर्ष स्थान बना सकता है। चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग की स्मृति में मनाए गए National Space Day 2026 के अवसर पर प्रधानमंत्री ने देश के प्रमुख स्पेस स्टार्टअप्स और निजी कंपनियों के संस्थापकों व मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की।

PM Modi space sector 2026 विज़न पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा वैश्विक माहौल और आकर्षण तैयार करना चाहिए जिससे दुनिया भर की बेहतरीन प्रतिभाएं और निवेशक यहां के स्पेस इकोसिस्टम से जुड़ने के लिए प्रेरित हों। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि दुनिया भर के युवाओं के मन में यह भाव पैदा होना चाहिए कि यदि उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना है, तो उन्हें भारत आना चाहिए और भारतीय स्पेस एजेंसियों व स्टार्टअप्स से जुड़ना चाहिए।

तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और निजी निवेश

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने निजी उद्यमियों के साहस की सराहना की, जिन्होंने 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र के उदारीकरण के बाद सरकार की नीतियों पर भरोसा जताते हुए इस नई राह को चुना। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में देश में जहां केवल एक स्पेस स्टार्टअप था, वहीं आज India space startups की संख्या बढ़कर 440 से अधिक हो चुकी है।

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पॉलिसी रिफॉर्म्स और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को आसान बनाए जाने से Indian space sector private investment में लगभग छह गुना उछाल आया है। वित्त वर्ष 2021-22 में निजी निवेश जहां 100.5 मिलियन डॉलर था, वहीं 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 618.5 मिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है। स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉस्मॉस, पिक्सल, ध्रुवा स्पेस और गैलेक्सआई जैसी अग्रणी private space companies India न केवल रॉकेट लॉन्चिंग बल्कि सैटेलाइट निर्माण, रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट, स्पेस-आधारित अर्थ ऑब्जर्वेशन और इन-ऑर्बिट रीफ्यूलिंग जैसी उन्नत तकनीकों पर तेजी से काम कर रही हैं।

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वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में भारत की बड़ी छलांग की तैयारी

वर्तमान में वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री का कुल आकार लगभग 600 बिलियन डॉलर आंका गया है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी वर्तमान में करीब 9 बिलियन डॉलर की है। सरकार और उद्योग जगत का लक्ष्य अगले एक दशक में India space economy 40-45 billion डॉलर तक पहुंचाने का है।

प्रधानमंत्री ने संवाद के दौरान स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष तकनीक का दायरा केवल रॉकेट लॉन्च तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कृषि, आपदा प्रबंधन, इंफ्रास्ट्रक्चर मैपिंग और ग्राउंड-स्टेशन नेटवर्क्स जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों में भी इसका अधिकतम उपयोग होना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार नीतिगत निरंतरता बनाए रखेगी ताकि निजी उद्यमी और निवेशक पूरे आत्मविश्वास के साथ जोखिम उठाकर नए शोध और इनोवेशन में आगे बढ़ सकें।

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