भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी की सक्रिय सदस्यता और सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटने का फैसला दोबारा सामने रखा है। उन्होंने 17 अगस्त को बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन को पत्र भेजकर अपना इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध किया। पूनावाला के मुताबिक, वह गंभीर व्यक्तिगत और वित्तीय परिस्थितियों के कारण सभी पदों से निकलकर निजी क्षेत्र में जाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, उनके पत्र में हाल के कुछ घटनाक्रमों और कुछ व्यक्तियों का भी जिक्र है, जिसने उनके फैसले को और पक्का किया।
सबसे अहम बात यह है कि पूनावाला ने खुद किसी राजनीतिक विवाद को अपने इस्तीफे की मुख्य वजह नहीं बताया है। इसलिए उनके फैसले को पार्टी के भीतर किसी खास व्यक्ति या गुट से टकराव का नतीजा बताना सही नहीं होगा।
पूनावाला का बीजेपी छोड़ने का फैसला अचानक 17 अगस्त को सामने नहीं आया। उन्होंने बताया कि वह 30 जुलाई को ही पार्टी अध्यक्ष को सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की पेशकश कर चुके थे। उस समय पार्टी अध्यक्ष ने उनका इस्तीफा स्वीकार न करते हुए उनसे फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था। इसके बाद उनके X बायो से बीजेपी और राष्ट्रीय प्रवक्ता पद का उल्लेख हटने पर उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
अब करीब ढाई सप्ताह बाद पूनावाला ने दोबारा पत्र भेजकर साफ किया कि वह अपने फैसले पर कायम हैं। उन्होंने लिखा कि काफी गंभीर विचार के बाद ही उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद और सक्रिय प्राथमिक सदस्यता को त्यागने का कठिन निर्णय लिया है।
पूनावाला ने अपने त्याग पत्र में लिखा कि हाल के दिनों के घटनाक्रम और कुछ व्यक्तियों की भूमिका ने उनके इस फैसले को मज़बूत किया है और इसे बात की सबसे अधिक चर्चा हो रही है। लेकिन उन्होंने न तो उन व्यक्तियों के नाम बताए और न ही यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया कि उनका इशारा किस घटना की ओर है। इसलिए फिलहाल यह कहना कि इस्तीफा किसी खास बीजेपी नेता से नाराजगी या संगठन के विवाद के कारण हुआ है सही नहीें होगा।
शहजाद पूनावाला 2017 में कांग्रेस के आंतरिक अध्यक्ष पद हेतु हुए ञचुनाव को लेकर राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाने के बाद सुर्खियों में आए थे। बाद में उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़कर दिसंबर 2017 में बीजेपी की सदस्ता ग्रहण कर ली थी। इसके बाद वह पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में शामिल हुए और टीवी बहसों में बीजेपी का प्रमुख चेहरा बने।
फिलहाल इस मामले का सबसे सटीक सार यही है कि पूनावाला ने बीजेपी छोड़ने के लिए व्यक्तिगत और वित्तीय परिस्थितियों को मुख्य कारण बताया है। साथ ही कुछ वर्तमान घटनाक्रमों का उन्होंने अलग से उल्लेख किया है, लेकिन उनकाई जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। इसलिए उनके इस्तीफे को लेकर इससे आगे की राजनीतिक स्थिति का अनुमान लगाना फिलहाल कठिन होगा।